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30 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

30 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 1611 - गुस्टाॅफ द्वितीय एडोल्फ 17 साल की उम्र में स्वीडन का राजा बना। 1922 - बेनिटो मुसोलिनी ने इटली में सरकार बनाई। 1930 - तुर्की तथा यूनान ने मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किये। 1945 - भारत संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। 1956 - भारत का पहला पांच सितारा होटल ‘अशोक’ खुला। 1960 - ब्रिटेन में पहली बार सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट की गई। 1963 - अफ्रीकी देश मोरक्को तथा अल्जीरिया ने युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर किए। 1975 - स्पेन में किंग जुआन कारलोस ने सत्ता संभाली। 1980 - मध्य अमेरिकी देशों होंडुरस तथा अल सल्वाडोर ने सीमा विवाद हल किया। 1994 - बाल्कन देश मेसिडोनिया के संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन की जीत। 2001 - लादेन के सम्पर्क में रहने के आरोपी 3 परमाणु वैज्ञानिकों को पाकिस्तान ने अमेरिका को सौंपा। 2003 - ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स का भारत दौरा प्रारम्भ। 2003 - अमेरिकी विदेश मंत्री कोलिन पावेल ने पाकिस्तान को भारत के साथ शांति वार्ता करने को कहा। 2003 -  पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने लोकतंत्र की बहाली के लिए...

जापान की यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री द्वारा प्रेस वक्तव्य

प्रधानमंत्री और मेरे घनिष्ठ मित्र आबे जी , Distinguished delegates,  Friends,  नमस्ते!   कोन्नचिवा!   यहाँ टोक्यों में ,  और इससे पहले यामानाशी में और अपने घर में जिस आत्मीयता के साथ आबे सान ने मेरा स्वागत किया ,  उसने मेरी इस जापान यात्रा की सफलता को और भी अविस्मरनीय बना दिया है। जापान पूरब और पश्चिम की सभ्यताओं के सर्वश्रेष्ठ पहलुओं का संगम है। यह वही महान देश है जिसने सिखाया है कि मानव जाति के विकास का रास्ता पुरातन और नूतन के बीच टकराव का नहीं ,  बल्कि उनके सह-अस्तित्व और सृजन का है। नये का स्वागत और पुराने का सम्मान  –  यह जापान की विश्व सभ्यता को प्रमुख देन है। और साथ ही भारत और जापान की एक गहरी समानता भी। Excellencies,  जापान और भारत के सम्बन्धों को हिन्द और प्रशांत महासागरों सी गहराई और विस्तार प्राप्त हैं। ये सम्बन्ध लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रताओं के प्रति और  Rule of Law  के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। अपने संबंधों के आगामी विकास के लिए एक विशाल विज़न पर कल और आज आबे सान के साथ मेरी बहुत उप...

सिखों के पराक्रम, प्रतिबद्धता और मानवता के प्रति उनके योगदान को सलाम करता हूं: उप-राष्‍ट्रपति

उप राष्‍ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि वे सिख समुदाय के पराक्रम ,  प्रतिबद्धता और मानवता के प्रति उनकी सेवाओं को सलाम करते हैं। अविश्‍वास ,  पूर्वाग्रह और असहिष्‍णुता से भरे मौजूदा समय में ये गुण और भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण हैं।   श्री नायडू ने आज नई दिल्‍ली में  ‘ प्रोमिनेंट सिख्‍स ऑफ इंडिया ’  पुस्‍तक का विमोचन करने के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस पुस्‍तक में समाज के विभिन्‍न क्षेत्रों से जुड़े 50 जाने-माने सिखों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है। यह पुस्‍तक सिख धर्म के प्रवर्तक श्री गुरूनानक देव जी को सच्‍ची श्रद्धांजलि है। प्रभलीन सिंह द्वारा लिखी गई यह पुस्‍तक पंजाब विश्‍वविद्यालय की ओर से प्रकाशित की गई है। उप राष्‍ट्रपति ने कहा कि गुरूनानक जी ने जाति ,  धर्म और समुदाय में भेदभाव किए बिना निर्धनतम लोगों की सेवा कर देश के लिए बड़ा योगदान किया। उन्‍होंने एक ऐसे समाज की नींव रखी जिसका मुख्‍य कर्तव्‍य लोगों की सेवा और राष्‍ट्र निर्माण में योगदान करना है। उन्‍होंने कहा कि जब भी जरूरत पड़ी सिख हमेशा देश रक्षा के लि...

गुरू नानक की शिक्षा से प्रेरित सिख समाज की मानव सेवा अनुकरणीय – उपराष्ट्रपति

भारत के  50  प्रतिष्ठित सिख नागरिकों के जीवन वृत्त के संकलन  ‘Prominent Sikhs of India’  के विमोचन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने सिख मत में निहित नि:स्वार्थ मानवसेवा की भावना को वृहत्तर समाज के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि सिख समाज ने न केवल देश और विश्व के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है बल्कि सभी भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा की है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विश्व के विभिन्न भागों में सिखों द्वारा की जा रही मानवसेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव के उपदेशों में  ‘Care and Share’  की मूल भारतीय परंपरा निहित है। सिख समुदाय की वीरता की परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इतिहास वीर सिखों के देशप्रेम और देशभक्ति का साक्षी है। जब-जब देश को आवश्यकता पड़ी सिखों ने अपना सर्वस्व लगा कर देश की रक्षा की है।       इस अवसर पर युवा प्रतिभा पलायन की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवा पाठक इन प्रतिष्ठित विभूतियों के ...

सुस्‍त जीवन शैली, जंक फूड छोंड़ें और स्‍वस्‍थ रहें : उप राष्‍ट्रपति

  उप-राष्‍ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं को सलाह दी है कि वे सुस्‍त जीवन शैली , जंक फूड को छोड़ें और स्‍वस्‍थ रहें। उप राष्‍ट्रपति ने लोगों का आह्वान किया कि वे योग को अपने रोजमर्रा के जीवन का अभिन्‍न अंग बनाएं ताकि जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों से निपटा जा सके। उप राष्‍ट्रपति  ‘ योग एंड माइंडफुलनैस ’  पुस्‍तक का विमोचन  करने के बाद एकत्र जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस पुस्‍तक को जानी-मानी योगाचार्य मानसी गुलाटी ने लिखा है।       उप राष्‍ट्रपति ने जोर देकर कहा कि योग से गहरे अवसाद , जीवन शैली के जुड़े रोगों से निपटने में मदद मिलती है और व्‍यक्ति स्‍वस्‍थ रहता है। योग का अभ्‍यास करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, फेफड़े अच्‍छे तरीके से काम करते हैं, पाचन क्रिया और संचार बेहतर होता है। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता में सुधार होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है।      उप राष्‍ट्रपति ने लोगों का आह्वान किया कि वे रोगों से बचने के लिए योग का अभ्‍यास करें। उन्‍होने कैंसर के बढ़ते मामलों और मोटापा जैसी जीवन शैल...

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज हिमाचल प्रदेश के कांगडा में डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। राष्‍ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि देश में बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए बड़ी संख्‍या में अच्‍छे डॉक्‍टरों और मेडिकल कॉलेजों की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि अच्‍छे चिकित्‍सा संस्‍थानों को प्रोत्‍साहित करने और मेडिकल शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए हाल ही में भारतीय चिकित्‍सा परिषद (संशोधन) अध्‍यादेश ,  2018 लाया गया है। श्री कोविंद ने कहा कि इससे मेडिकल कॉलेजों की स्‍थापना ,  विस्‍तार और आधुनिकीकरण को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

'मन की बात’ की 49वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार। 31 अक्तूबर हम सबके प्रिय सरदार वल्लभभाई पटेल की जयन्ती और हर वर्ष की तरह ‘Run for Unity’ के लिए देश का युवा एकता के लिए दौड़ने को तैयार हो गया है। अब तो मौसम भी बहुत सुहाना होता है।यह ‘Run for Unity’ के लिए जोश को और बढ़ाने वाला है।मेरा आग्रह है कि आप सब बहुत बड़ी संख्या में एकता की इस दौड़ में ‘Run for Unity’ में अवश्य भाग लें। आज़ादी से लगभग साढ़े छह महीने पहले,27 जनवरी 1947 को विश्व कीप्रसिद्ध international magazine ‘Time Magazine’ ने जो संस्करण प्रकाशित किया था,उसके cover page पर सरदार पटेल का फोटो लगा था।अपनी lead story में उन्होंने भारत का एक नक्शा दिया था और ये वैसा नक्शा नहीं था जैसा हम आज देखते हैं।ये एक ऐसे भारत का नक्शा था जो कई भागों में बंटा हुआ था। तब 550 से ज्यादा देशी रियासते थीं।भारत को लेकर अंग्रेजों की रूचि ख़त्म हो चुकी थी, लेकिन वो इस देश को छिन्न-भिन्न करके छोड़ना चाहते थे।‘Time Magazine’ ने लिखा था कि भारत पर विभाजन, हिंसा, खाद्यान्न -संकट, महँगाई और सत्ता की राजनीति से जैसे खतरे मंडरा रहे थे।आगे ‘Time Magazine’ लिखता है...