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अल्बर्ट आइंस्टीन के सुविचार

विश्व एक महान पुस्तक है जिसमें वे लोग केवल एक ही पृष्ठ पढ पाते हैं जो कभी घर से बाहर नहीं निकलते। धर्मरहित विज्ञान लंगडा है, और विज्ञान रहित धर्म अंधा।  अवसर के रहने की जगह कठिनाइयों के बीच है।  तर्क, आप को किसी एक बिन्दु 'क' से दूसरे बिन्दु 'ख' तक पहुँचा सकते हैं। लेकिन, कल्पना, आप को सर्वत्र ले जा सकती है।  हम भारतीयों के बहुत ऋणी हैं जिन्होंने हमे गिनना सिखाया, जिसके बिना कोई भी मूल्यवान वैज्ञानिक खोज सम्भव नही होती। अट्ठारह वर्ष की उम्र तक इकट्ठा किये गये पूर्वाग्रहों का नाम ही सामान्य बुद्धि है।  प्रकृति को गहराई से देखें, और आप हर चीज़ को बेहतर समझ पाएंगे।  आपकी कल्पनाशक्ति आपके जीवन के आने वाले आकर्षणों का पूर्वावलोकन है।  ऐसा नहीं है कि मैं कोई अति प्रतिभाशाली व्यक्ति हूँ; लेकिन मैं निश्चित रूप से अधिक जिज्ञासु हूँ और किसी समस्या को सुलझाने में अधिक देर तक लगा रहता हूँ।  सफल मनुष्य बनने के प्रयास से बेहतर है गुणी मनुष्य बनने का प्रयास।  सफल व्यक्ति होने का प्रयास न करें, अपितु गरिमामय व्यक्ति बनने का...

स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन के आधारभूत सिद्धान्त

स्वामी विवेकानन्द के शिक्षा दर्शन के आधारभूत सिद्धान्त निम्नलिखित हैं – १. शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सके। २. शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक के चरित्र का निर्माण हो, मन का विकास हो, बुद्धि विकसित हो तथा बालक आत्मनिर्भन बने। ३. बालक एवं बालिकाओं दोनों को समान शिक्षा देनी चाहिए। ४. धार्मिक शिक्षा, पुस्तकों द्वारा न देकर आचरण एवं संस्कारों द्वारा देनी चाहिए। ५. पाठ्यक्रम में लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार के विषयों को स्थान देना चाहिए। ६. शिक्षा, गुरू गृह में प्राप्त की जा सकती है। ७. शिक्षक एवं छात्र का सम्बन्ध अधिक से अधिक निकट का होना चाहिए। ८. सर्वसाधारण में शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार किया जान चाहिये। ९. देश की आर्थिक प्रगति के लिए तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था की जाय। १०. मानवीय एवं राष्ट्रीय शिक्षा परिवार से ही शुरू करनी चाहिए। *******